Tuesday, 22 April 2014

Asaram Bapu case: Prosecution completes arguments in Jodhpur District and Sessions court

Asaram Bapu case: Prosecution completes arguments in Jodhpur District and Sessions court
The prosecution today completed its arguments in the case of alleged sexual assault of a teenage girl by self-styled godman Asaram Bapu.
 The prosecution today completed its arguments in the case of alleged sexual assault of a teenage girl by self-styled godman Asaram Bapu

JODHPUR: The prosecution today completed its arguments in the case of alleged sexual assault of a teenage girl by self-styled godman Asaram Bapu.

"We completed our arguments today... The defence will cross-examine the girl on April 25," said public prosecutor R L Meena.

He said examination of the girl was completed on April 15, but today some photographs and video recordings pertaining to the case were verified by her in the Jodhpur District and Sessions Court. On April 11, the girl had turned emotional and had said in the court that the person, whom she and her parents trusted, did such an immoral behaviour with her. She had also recounted her statements given to the police and magistrate.

The court, however, will continue with cross-examination of the first prosecution witness Pushplata, ASI of the Kamla Market police station in Delhi, where the victim had lodged the Zero FIR, and had got her statements recorded. So far five witnesses have appeared in the court, out of total 58 to be examined, the list of which had been submitted to the court by the prosecution.

Meanwhile, the condition of Asaram deteriorated soon after he entered the courtroom. He was taken back to the jail. After preliminary check-up by jail doctors, Asaram was taken to the Ayurveda Hospital of the Ayurveda University here. Asaram is lodged in the Jodhpur Central Jail since September 2 last year after he was booked for the sexual assault on the girl.
 Source : http://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/asaram-bapu-case-prosecution-completes-arguments-in-jodhpur-district-and-sessions-court/articleshow/34048590.cms

Friday, 11 April 2014

आसाराम की तीसरी जमानत याचिका खारिज

आसाराम की तीसरी जमानत याचिका खारिज
जोधपुर: जोधपुर की जिला एवं सत्र अदालत ने आज यहां प्रवचन करने वाले आसाराम की तीसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। उन्होंने स्वास्थ्य आधार पर जमानत की मांग की थी। लोक अभियोजक आर एल मीणा के अनुसार आसाराम ने स्वास्थ्य के आधार के अलावा अन्य कारणों के आधार पर जमानत की मांग की थी। उन कारणों का पिछली जमानत याचिकाओं में उल्लेख किया गया है।

मीणा ने कहा, ‘लेकिन हमने आपत्ति जताई और उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट पेश की। वह सामान्य है।’ जोधपुर जिला अदालत के न्यायाधीश मनोज कुमार व्यास ने परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं होने और आसाराम के मामले में मुकदमा शुरू हो जाने के मद्देनजर जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले दो अवसरों पर उच्च न्यायालय ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
Source :  http://zeenews.india.com/hindi/news/state/court-rejects-asaram-bapu-s-third-bail-plea/206679

JDA demolishes part of Asaram's ashram from govt land

JDA demolishes part of Asaram's ashram from govt land

Jaipur, Mar 25 (PTI) Jaipur Development Authority today removed encroachments, including part of an ashram of self-styled godman Asaram Bapu, from a government land at Goner road here.

The land was encroached for self-styled godman Asaram Bapu's ashram and a team today removed the portion of the ashram from the land, official sources said.

The authority had sealed the Ashram last week, they said.

The controversial godman is lodged at Central Jail Jodhpur?on charges of sexually assaulting a minor girl.
Source : http://www.ptinews.com/news/4539090_JDA-demolishes-part-of-Asaram-s-ashram-from-govt-land.html
 

देश को साफ सुथरी सरकार चाहिए: श्री रविशंकर

देश को साफ सुथरी सरकार चाहिए: श्री रविशंकर
फर्रुखाबाद (एसएनएन): आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक एवं आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि देश में खिचड़ी सरकार की जरूरत नहीं बल्कि एक स्वच्छ छवि वाली मजबूत सरकार की जरूरत है. देश के जागरूक मतदाताओं को चाहिए कि वे जातिवाद से ऊपर उठकर स्वच्छ छवि वालों को चुनें. देश के सभी राजनेता भ्रष्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि जो मुख्यमंत्री अपने दायित्वों को नहीं निभा सका, उसे अनुभवहीन ही कहा जाएगा. उन्होंने कहा कि आज देश में भ्रष्टाचार और अपराधियों की गंदगी छाई हुई है जिसे संसद तक न पहुंचने देने के लिए जनता को अच्छे व्यक्ति को चुनना होगा.
रविशंकर ने अच्छी छवि वाले राजनेताओं को चुनने के लिए जनता से शत प्रतिशत मतदान करने की अपील की. रविशंकर कल देर रात आयोजित एक आध्यात्मिक सत्संग समारोह को संबोधित करने के उपरान्त पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि धर्मगुरू कभी भी जनता का हक नहीं छीनते. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस तरह शंकराचार्य निर्दोष साबित हुए ऐसे ही बापू आसाराम को भी न्यायालय से राहत मिलेगी. उन्होंने कहा कि आसाराम बापू के किसी भी गवाह पर तेजाब फेंका जाना अनुचित है. रविशंकर ने एक अन्य सवाल के जवाब में यह माना कि आर्ट ऑफ लिविंग संस्था में कुछ भ्रष्ट लोग जुड़ गए हैं.

Source : http://www.shrinews.com/DetailNews.aspx?NID=34031
 

आसाराम बापू और सुब्रत राय सहारा के मामले में एक गजब की समानता

subrato roy sahara
आसाराम बापू और सुब्रत राय सहारा के मामले में एक गजब की समानता देखी गई। वह यह कि अपने - अपने क्षेत्र के इन दोनों दिग्गजों पर जब कानून का शिकंजा कसना शुरू हुआ , तो दोनों ने पहले इसे काफी हल्के में लिया। उनके हाव - भाव से यही लगता रहा कि इनकी नजर में एेसी बातों का कोई महत्व नहीं है। उनके प्रताप से कानून की सारी कड़ाई धरी रह जाएगी। लेकिन कमाल देखिए कि एक बार ये कानून के शिकंजे में फंसे तो फिर इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता फिलहाल इन्हें या इनके कुनबे को नहीं सूझ रहा। कुछ एेसा ही हाल 1990 के दशक में फिल्म अभिनेता संजय दत्ता का रहा था। मुंबई दंगों के दौरान घर में अवैध असलहा रखने के मामले में कानून ने जब संजय को गिरफ्त में लेना शुरू किया, तब  शुरू में संजय बिल्कुल बेपरवाह नजर आते रहे। पुलिस , अदालत औऱ जेल आदि उन्हें किसी  फिल्म की शूटिंग जैसा लगता रहा। आज भी चैनलों पर कभी - कभी उस दौर के फुटेज दिखाई देते हैं, तो साफ नजर आता है कि तब के अपेक्षाकृत दुबले - पतले संजय दत्त किस तरह लापरवाही से इधर - उधर आ - जा रहे हैं। लेकिन सच्चाई सामने आते ही संजय का जो हाल हुआ उसने उनके बूढ़े पिता को काफी रुलाया। 

अब सहारा प्रकरण में सुब्रत राय सहारा का हश्र सचमुच हैरान करने वाला है। ताजा प्रकरण के जरिए ही कई चैनलों पर सुब्रत राय की शानदार पार्टियों के फुटेज चले, जिसमें फिल्म से लेकर राजनीति औऱ खेल से लेकर विभिन्न क्षेत्रों की कई प्रतिष्टित हस्तियां उनकी पार्टी में शामिल होकर काफी गौरवान्वित नजर आई । इससे पहले दाऊद इब्राहिम की पार्टियों में भी एेसा नजारा देखा जा चुका है। बेशक सेलीब्रिटीज किसी के साथ एेसा रिश्ता खास तौर पर उपकृत होने के बाद ही बनाते हैं। अन्यथा देखा गया है कि जनजीवन में बेहद आत्मीयता व सम्मान के साथ सभा - समारोह में बुलाए जाने पर भी एेसे लोग किस तरह बात - बेबात नाक - भौं सिकोड़ते रहते हैं, औऱ पूरी उपस्थिति के दौरान एेसा साबित करते हैं कि उनके कार्यक्रम में उपस्थित होकर उन लोगों ने संबंधितों को अपना जीवन सुधारने का मौका दिया है। लेकिन  निवेशकों का पैसा लौटाने के मामले में सुब्रत राय की गिरफ्तारी के बाद से यही  ब्रिगेड जिसमें से शत - प्रतिशत एेसी ही पृवत्ति के लोग शामिल हैं, बिल्कुल खामोश है।   

आज जब राय लगातार हिरासत में है, और उनके इस दुष्चक्र से बाहर निकलने की कोेई संभावना नजर नहीं आ रही है। लगता है सुब्रत राय की सेलीब्रिटी  ब्रिगेड ने उनसे दूरी बना कर उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। ताजा घटना भी चकाचौंध पसंद करने वालों के लिए एक सबक के समान है कि सेलीब्रिटीज किसी की नहीं होती। उसे सिर्फ पैसे औऱ पावर से मतलब होता है। यह जिसके पास होता है, सेलीब्रिटीज भी उन्हीं के बगल खड़े होना पसंद करते हैं। यह विडंबना गांव - कस्बे से लेकर राज्यों व देश तक समाज के हर क्षेत्र में फैली हुई है। सामान्य जीवन यापन में भी देखने को मिलता है कि किस तरह किसी के अचानक सफलता हासिल करने पर समाज के हर वर्ग के लोग उसके बगल खड़े होने में गर्व महसूस करते हैं। लेकिन किन्ही कारणों से उसके दुर्दिन शुरू होते ही लोग तत्काल  उससे मुंह भी  फेर लेते हैं।  कथित सफलता के एेसे शिखर की सच्चाई शायद सुब्रत राय को अब तक समझ आ गई होगी। इससे बेहतर तो समाज के निचले स्तर के वे लोग जिन्हें मुसीबत में उनके जानने वाले यूं असहाय नहीं छोड़ते, और जितना संभव हो पाता है, उनका साथ निभाने का भरसक प्रयास करते हैं। 
Source : http://www.liveaaryaavart.com/2014/04/subrato-roy-celebrity-status.html
 

आसाराम प्रकरण: पुलिस अफसर को कोर्ट में बयान से रोका

आसाराम प्रकरण: पुलिस अफसर को कोर्ट में बयान से रोका
 
 
आसाराम प्रकरण: पुलिस अफसर को कोर्ट में बयान से रोका
लखनऊ। दुष्कर्म प्रकरण की गवाही शुरू होते ही आसाराम के गुर्गों ने गवाहों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जोधपुर कोर्ट में बयान को आई दिल्ली पुलिस की एएसआइ पुष्पलता को भी उन्होंने नहीं बख्शा। कोर्ट जाने से रोकने के लिए गुर्गो ने वहां जमकर हंगामा किया। इस मामले में जोधपुर पुलिस ने 129 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है।
शाहजहांपुर में पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी के केस में 19 मार्च को दिल्ली पुलिस की एएसआइ पुष्पलता की गवाही होनी थी। आसाराम के गुर्गों ने जाल बिछाकर उन्हें गवाही से रोकने की कोशिश की। उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। इससे गवाही देर से शुरू हो सकी। जोधपुर पुलिस ने मामले में 129 लोगों को पाबंद कर कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को एएसआइ निरपाल सिंह के साथ पुष्पलता की गवाही पूरी की गई।
लखनऊ में गवाह पर कार से हमला
लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में रह रहे आसाराम के पूर्व सचिव और जोधपुर, अहमदाबाद और सूरत केस के प्रमुख गवाह राहुल के सचान पर कार से जानलेवा हमला किया। राहुल ने जागरण को बताया कि प्लानिंग के तहत सफेद रंग की टाटा इंडिगो की नंबर प्लेट पर मिट्टी लगाकर हमला किया गया। ठाकुरगंज थाने में जब उन्होंने मामले की सूचना दी और एफआइआर का आग्रह किया तो पुलिस ने उल्टा उन्हें ही जेल भेजने की धमकी देकर भगाने की कोशिश की। जब अहमदाबाद की एसीपी कानन देसाई से फोन पर वार्ता कराई तब जाकर पुलिस ने शिकायत दर्ज की। शिकायत में राहुल ने आसाराम, उनकी पत्‍‌नी लक्ष्मी, पुत्री भारती, पुत्र नरायण साई और जमानत पर रिहा हुए शिवा को आरोपी बनाया है। कहा कि इन्हीं के इशारे पर अज्ञात लोगों ने जान से मारने का प्रयास किया।
टॉप मोस्ट में राहुल
राहुल ने बताया कि सूरत में तेजाब हमले में गिरफ्तार लोगों के पास मिली लिस्ट में सबसे ऊपर उनका नाम है। राहुल ने बताया कि सूरत पुलिस ने यह जानकारी देकर सतर्क और सुरक्षित रहने की सलाह दी है।
गवाहों को सुरक्षा देने की मांग
पीड़िता के पिता ने कहा कि जबसे शिवा, शिल्पी समेत चार सह आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आए, हमले तेज हो गए। बताया कि महीने भीतर सूरत में तीन हमले हुए, अब जोधपुर कोर्ट में एएसआइ को गवाही को रोकने का प्रयास किया गया। लखनऊ में राहुल सचान को जान से मारने की धमकी के तीसरे दिन कार से कुचलने की कोशिश की गई। उन्होंने प्रकरण में बेटी के पक्ष के सभी 58 गवाहों को कड़ी सुरक्षा देने की मांग की है।

Source : http://www.jagran.com/news/state-obstacle-in-asaram-issue-11172459.html

आसाराम प्रकरण में पीड़िता के गवाह को खतरा बढ़ा

आसाराम प्रकरण में पीड़िता के गवाह को खतरा बढ़ा

आसाराम प्रकरण में पीड़िता के गवाह को खतरा बढ़ा
लखनऊ। आसाराम के गुर्गो से आंख बचाकर लखनऊ पहुंचे जोधपुर, सूरत और अहमदाबाद दुष्कर्म केस के सरकारी गवाह को खतरा बढ़ गया है। सूरत और अहमदाबाद के पुलिस अधिकारियों के आग्रह के बावजूद यूपी पुलिस ने सरकारी गवाह को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई है।
ताजा मामला जुड़ा है आसाराम के मुख्य राजदार और पूर्व सचिव राहुल सचान से। कानपुर निवासी राहुल ने करीब दस वर्ष तक आसाराम के मुख्य सेवादार व सचिव के रूप में व्यवस्थाओं का संचालन किया। शाहजहांपुर की पीड़िता समेत सूरत तथा अहमदाबाद केस में वहां की पुलिस ने राहुल को सरकारी गवाह बनाया है। कानपुर, इलाहाबाद, के बाद जब राहुल ने लखनऊ में ठिकाना बनाया तो वहां भी आसाराम के गुर्गे पहुंच गए। होली के दिन उन्होंने ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में राहुल को कार से कुचलने की कोशिश की। थाने में घटना की सूचना भी दर्ज कराई गई। अहमदाबाद की एसीपी कानन देसाई तथा सूरत के डीसीपी ने लखनऊ के एसएसपी को फैक्स भेजकर सरकारी गवाह राहुल की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने का अपेक्षा की। लेकिन यूपी पुलिस ने कोर्ट के गवाह को सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई।
पुलिस से स्थाई सुरक्षा संभव नहीं
लखनऊ चौक क्षेत्र के सीओ सर्वेश मिश्र ने सूरत और अहमदाबाद के पुलिस अफसरों के फैक्स की पुष्टि की। कहा कि राहुल की सुरक्षा की बाबत एसपी कार्यालय को फैक्स मिला है। गवाह से वार्ता कर सुरक्षा बोध कराया जाएगा। लेकिन स्थाई सुरक्षा देना सरकार का काम है। इसके लिए खुद राहुल को सुरक्षा के लिए आवेदन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि एसओ शशिकांत यादव को सुरक्षा की बाबत दिशा निर्देश दे दिए गए हैं।
फंसाना चाह रही थी पुलिस
पीडि़ता के गवाह व आसाराम के पूर्व सचिव राहुल का कहना है कि उन्हें पुलिस झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने के प्रयास में थी। बताया कि होली के दिन हमले की सूचना दर्ज कराने जब वह ठाकुरगंज थाना पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें घेर लिया और मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी। जब अहमदाबाद की एसीपी कानन देसाई ने वार्ता की, तब जाकर पुलिस ने छोड़ा।

Source : http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-witness-rahul-in-bathration-on-asaram-issue-11203244.html