Friday, 22 August 2014

लालच देकर शारीरिक शोषण करता था आसाराम

लालच देकर शारीरिक शोषण करता था आसाराम

Publish Date:Sat, 23 Aug 2014 05:57 AM (IST) | Updated Date:Sat, 23 Aug 2014 06:18 AM (IST)

लालच देकर शारीरिक शोषण करता था आसाराम

अहमदाबाद, ब्यूरो। आसाराम के खिलाफ सूरत की पूर्व साधिका द्वारा दर्ज करवाई गई शारीरिक शोषण की शिकायत के अंतर्गत राज्य सरकार ने गुजरात हाईकोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत कर उसकी करतूतों का पर्दाफाश किया है। हलफनामे में दावा किया गया कि आसाराम आश्रम की महिलाओं से ओरल सेक्स करता था। वह किशोरियों को अच्छा वक्ता बनाने का लालच देकर शारीरिक शोषण करता था। जब वह खफा होता, तब गाली--गलौज कर जो हाथ में आया उसी से वार कर देता था।
आसाराम ने गुजरात उच्च न्यायालय में जमानत याचिका प्रस्तुत की है। राज्य सरकार ने जमानत याचिका का विरोध कर चांदखेड़ा पुलिस द्वारा प्रस्तुत आरोपों व गवाहों के बयान पेश किए हैं। हलफनामे में बताया गया है कि सूरत की पीड़ित युवती केवल 16 वर्ष की थी।
उसी समय उसे आश्रम में रहने के लिए चुना गया था। उसे एसएससी की परीक्षा में भी बैठने नहीं दिया गया था। उसके बाद उसे वक्ता बनाने का लालच देकर आश्रम में ही रहने के लिए मजबूर किया गया।
Source : http://www.jagran.com/news/national-allegations-of-physical-abuse-on-asaram-11574664.html?src=p1

Wednesday, 16 July 2014

आसाराम समर्थकों ने पुलिस पर फेंके जूते-चप्पल

आसाराम समर्थकों ने पुलिस पर फेंके जूते-चप्पल

asaram supporters on police
दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद आसाराम के समर्थकों ने शुक्रवार को कोर्ट परिसर और जेल के बाहर से कोर्ट तक के रास्ते के बीच पुलिस पर कई बार जूते-चप्पल और पत्थर फेंके। समर्थकों ने पूरे रास्ते जमकर हंगामा किया और पुलिस के कई बार पसीने छुड़ाए।

पेशी के दौरान लाए गए आसाराम के दर्शन को आई हजारों लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने में शहर पुलिस दिनभर उलझी रही। आसाराम को वज्र गाड़ी में कोर्ट परिसर में दोपहर दो बजे पेशी पर लाया गया।

इस दौरान रास्ते में सड़क के दोनों ओर हजारों समर्थकों की भीड़ खड़ी थी। पेशी के दौरान समर्थक कोर्ट परिसर में घुस गए। पुलिस ने उन्हें रोका तो वे भड़क गए।


समर्थकों ने पुलिस पर जूते-चप्पल, बोतलें, पत्थर आदि फेंकने शुरू कर दिए। पुलिस ने बल प्रयोग कर कोर्ट परिसर से उन्हें खदेड़ा। मोहनपुरा पुलिया व सेन्ट्रल जेल के बाहर से भी समर्थकों को खदेड़ा। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक थी।

भीड़ अनियंत्रित होने पर कोर्ट परिसर से आसाराम को पुलिस जीप में बैठाकर उदयमंदिर होते हुए पब्लिक पार्क के रास्ते जेल ले गई। जबकि खाली वज्र गाड़ी को पावटा क्षेत्र से भेजा गया। वहां भी समर्थकों ने हंगामा किया। डीसीपी पूर्व राहुल जैन ने बताया कि जोधपुर आए आसाराम के अधिकतर समर्थक बाहरी राज्यों के हैं।

समर्थकों का हंगामा बर्दाश्त से बाहर होने के बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें कई बार खदेड़ा। कोर्ट परिसर में आसाराम का एक अनुयायी अपने गुरू को पहनाने के लिए पुदीने व मोगरे की माला लेकर आया था। जिसे पुलिस ने पकड़ लिया।\

http://www.amarujala.com/news/states/rajasthan/asaram-supporters-on-police/

Wednesday, 23 April 2014

मुझे कोई शिकवा नहीं, मैं सबको छोडकर जा रहा हूं, कोर्ट में बोले आसाराम

मुझे कोई शिकवा नहीं, मैं सबको छोडकर जा रहा हूं, कोर्ट में बोले आसाराम
मुझे कोई शिकवा नहीं, मैं सबको छोडकर जा रहा हूं, कोर्ट में बोले आसाराम
जोधपुर। मैं सबको छोड कर जा रहा हूं। मुझे किसी से कोई शिकवा-शिकायत नहीं हैं, लेकिन मानवाधिकार का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सोमवार को कोर्ट में पेश करने पर आसाराम ने सिर पकडकर यह बात कही। आसाराम बोले- "मुझे लेटा दो। अस्पताल भेज दो।"

आसाराम को जब सेंट्रल जेल से कोर्ट लाया गया तब वह गाडी की सीढियों पर ही बैठ गए और बोले- "तबीयत ठीक नहीं है।" कोर्ट में कुछ देर रूकने के बाद जब आसाराम ने कहा, "मुझे फंसाया जा रहा है। मैं बीमार हूं।" इस पर जज मनोज कुमार व्यास ने कहा- "जेल मैन्युअल के अनुसार कार्रवाई हो।"

जब जज ने जेल मैन्युअल के अनुसार कार्रवाई करने के लिए कहा तो मौजूद पुलिस अधिकारी ने उन्हें पुलिस के वाहन से पावटा अस्पताल चलने को कहा, मगर वह एंबुलेंस से ही आयुर्वेद विश्वविद्यालय जाने की जिद करने लगे। एंबुलेंस के नहीं पहुंचने पर पुलिस अधिकारी आसाराम को पुलिस वाहन में ही जेल तक छोडकर आए। जहां डिस्पेंसरी में उसे चेक किया गया। इसके बाद आयुर्वेद विश्वविद्यालय भेज दिया गया। यहां डॉक्टरों ने दवाई देकर दुबारा जेल भेज दिया।
Source : http://www.khaskhabar.com/hindi-news/National-rajasthan-news-asaram-feels-dizzyness-in-court-room-22510844.html

आसाराम का सेहत खराबी का दांव फेल

आसाराम का सेहत खराबी का दांव फेल
 
आसाराम का सेहत खराबी का दांव फेल
लखनऊ। दुराचार के आरोपसे निकलने को आसाराम का हाथ-पैर मारना भारी पड़ रहा है। सच की ताकत ने उनके सेहत खराबी के दांव की हवा निकाल दी। कोर्ट में दर्द और बेहोशी का नाटक कर पीड़िता और दिल्ली पुलिस की एसआइ के बयान रोकने की उनकी पोल खुल गई। आसाराम ने जिस अस्पताल से उपचार की डिमांड की थी वहां के चिकित्सकों ने उनको स्वस्थ बताकर भर्ती करने से इन्कार कर दिया। इस पर कोर्ट ने आसाराम को जेल भेज दिया और बयान के लिए 25 अप्रैल की तिथि मुकर्रर कर दी है।
शाहजहांपुर में पीड़िता के पिता ने बताया कि आसाराम ने नया दांव चलकर फिर मुसीबत खड़ी कर दी है। उन्होंने पीड़िता के सरकारी वकील अभियोजन अधिकारी आरएल मीना की नियुक्ति पर सवाल उठाकर बयान टालने की कोशिश की है। सोमवार को जोधपुर कोर्ट में आसाराम ने सीने में दर्द की शिकायत कर आयुर्वेदिक उपचार की मांग की थी। नतीजतन पीड़िता समेत दिल्ली पुलिस की एसआइ पुष्पलता के बयान दर्ज नहीं हो सके। कोर्ट ने आसाराम को उपचार के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल भेजा, लेकिन अस्पताल ने आसाराम को स्वस्थ बताकर भर्ती करने से ही मना कर दिया। पीड़िता के पिता ने बताया कि इस पर कोर्ट ने आसाराम को जेल भेज दिया। लेकिन अब आसाराम के वकीलों ने अभियोजन अधिकारी राजूलाल मीना की नियुक्ति पर सवाल उठाकर व्यवधान की कोशिश की है।
पीड़िता की शीघ्र न्या की गुहार
न्याय में देरी से पीड़िता के पिता आहत हैं। कहा कि उनकी बेटी की घटना के सप्ताह भर बाद ही मुंबई के शक्ति मिल में रेप हुआ था। इस मामले में फैसला आ चुका है, दोषियों को फांसी की सजा हो गई जबकि उनकी बेटी समेत 58 गवाहों की बयान बाकी हैं। उन्होंने शक्ति मिल कांड की तर्ज पर फैसले की गुहार लागाई है।
Source :  http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-11254736.html

Tuesday, 22 April 2014

आसाराम की कुटिया देखो आखें फटी की फटी रह जाएंगी

आसाराम की कुटिया देखो आखें फटी की फटी रह जाएंगी

भोपाल। क्या आपने इन्दौर में स्थित आसाराम की कुटिया को देखा है। 'कुटिया' शब्द के साथ ही ऐसा लगता है जैसे संतों को विश्राम के लिए छोटा सा शांत स्थान, लेकिन इन्दौर में कुटिया के नाम पर जो कुछ है वो किसी भी मल्टी करोड़पति के लक्झरी बंगले से कहीं ज्यादा है।

इस कुटिया में ​स्वीमिंग पुल, विदेशी पेड़, सीसी टीवी कैमरे, लक्झरी बेडरूम, लॉन और पूरे आश्रम पर नजर रखने के लिए टॉवर बनाया गया है। यह कुटिया 5000 स्वे फिट से ज्यादा इलाके में बनाई गई है और इसमें किसी भी खासोआम का प्रवेश हमेशा से ही प्रतिबंधित रहा है। तो ऐसी लक्झरी सुपर ड्यूप्लेक्स किलेनुमा कोठी को आसाराम की 'कुटिया' कहा जाता था जहां वो एकांतवास किया करते थे।

प्रशासन की 'जरीब' [जमीन नापने की जंजीर] से शनिवार को इंदौर के खंडवा रोड स्थित आसाराम आम का चप्पा--चप्पा नाप दिया गया। सरकारी नपती के बहाने पहली बार आसाराम की कुटिया का नजारा भी आम हो गया। आसाराम और नारायण साई के एकांतवास की गवाह रही 'कुटिया' अच्छे खासे बंगलो को भी मात दे रही थी।

'बापू' के इस आरामगाह में ऐशोआराम की तमाम सुविधाओं के साथ स्वीमिंग पूल भी बना था। आश्रम के पश्चिमी कोने में बनी इस कुटिया का वैभव देख अधिकारियों की आंखें भी फटी रह गई। हालांकि आसाराम के 'सेवादारों' के आगे अधिकारियों की भी नहीं चली। आसाराम के बंगलों की बाउंड्री के बाहर ही एसडीएम, टीआई और तहसीलदार समेत प्रशासन की पूरी टीम के जूते उतरा लिए।

शासन से लीज पर ली गई जमीन के हिसाब--किताब की जांच करने शनिवार सुबह सा़ढे दस बजे जिला प्रशासन का अमला आम पहुंचा। टीम में एसडीएम विजय अग्रवाल, एसएलआर राकेश शर्मा, तहसीलदार पूर्णिमा सिंगी के साथ राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों का पूरा दल शामिल था।

दिग्विजय सिंह के शासन काल में कुल 6.869 हेक्टेयर जमीन आसाराम को लीज पर दी गई थी। प्रशासन को शिकायत मिली थी कि लीज की आड़ में आसाराम के लोगों ने आसपास की सरकारी जमीन को भी दबा लिया है। साथ ही लीज-डीड में उल्लेखित शर्तो का भी उल्लंघन किया जा रहा है। शिकायत के बाद कलेक्टर ने जमीन की नपती और उपयोग की जांच आदेश देते हुए टीम को नपती के लिए भेज दिया।

राजस्व निरीक्षकों ने जरीब के जरिए आश्रम के मुख्य द्वार से जमीन की नपती शुरू की। पहले पूरे आश्रम को नापा गया। इसके बाद टीम सामने बने आसाराम गुरुकुल में पहुंच गई। दोपहर 2.40 बजे तक नपती का दौर चलता रहा। इस बीच यह तो साफ हो गया कि लीज के विपरीत आसाराम आम ने जमीन का उपयोग बदल लिया है। साथ ही नियम विरद्ध जमीन पर पक्के निर्माण और व्यवसायिक गतिविधियां भी चलाई जा रही हैं, जबकि आश्रम को सिर्फ योग केंद्र और औषधि उद्यान के लिए ही जमीन लीज पर दी गई थी।

छुपी हुई एशगाह

आम के मुख्य परिसर के पश्चिमी कोने पर गीता वाटिका नामक हिस्सा बनाया हुआ। बगीचेनुमा इस हिस्से में बड़ा गेट लगाकर प्रवेश बंद किया है। आसाराम, नारायण साई और उनके करीबी लोगों को ही इस हिस्से के अंदर दाखिल होने की इजाजत है। पेड़ों से ढंके हिस्से के पीछे की ओर आसाराम की कुटिया बनाई गई है, जो आश्रम के दूसरे हिस्सों से नजर भी नहीं आती। कुटिया से सीमेंटेड सीधा रास्ता आश्रम के बाहरी हिस्से में बने प्रवचन हॉल की व्यास पीठ की पीछे तक जाता है। जाहिर है यहां से निकलकर आसाराम और नारायण साई सीधे प्रवचन हॉल में प्रकट हो सकते हैं।

ऐसी है कुटिया

-- आसाराम की कुटिया असल में करीब पांच हजार वर्ग फीट में बना ढाई मंजिला बंगलो है।
-- यह करीब सात फीट ऊंची बाउंड्रीवॉल से घिरा है
--कुटिया के कंपाउंड में प्रवेश करने के लिए सामने एक बड़ा मुख्य द्वार है
-- कंपाउंड के पिछले हिस्से और बाउंड्रीवॉल के अंदर दाहिनी ओर एक-एक छोटा दरवाजा
-- इन दोनों पिछले दरवाजों तक आम के अंदरूनी पिछले हिस्से से ही पहुंचा जा सकता है, जहां आम भक्त या लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है
-- कंपाउंड के बीचोबीच ढाई मंजिला आसाराम का आवास और पास ही एक मंजिला मकान है
-- आसाराम आवास की तल मंजिल पर उनका आरामगाह है, जबकि सबसे ऊपर वॉच टावर जैसी सरंचना बनी हैं, जहां पर पहुंचकर पूरे आश्रम को देखा जा सकता है
-- आसाराम की इस कुटिया के पीछे और दाएं--बाएं बगीचा बना है। पीछे के बगीचे में झूला और दो कुर्सियां लगी हैं
-- कुटिया के अंदर दाखिल होने वाले दरवाजे से लेकर दीवारों के चारों कोनों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं
-- कुटिया के मुख्य द्वार में दाखिल होते से बाई ओर एक कार पार्किंग, जबकि दाहिनी ओर स्वीमिंग पूल भी बना हुआ है।
-- स्वीमिंग पुल में उतरने के लिए स्टील की सीढि़या तो हैं ही किनारे पर एक खास सीट भी बनी है, जो शायद संत के बैठने के लिए है।
-- आसाराम के आरामगाह के इस कंपाउंड में बगीचे को सजाने के लिए लैंडस्केपिंग की गई है।
-- आम--आंवले के पेड़ के साथ साइकस जैसे महंगे विदेशी पेड़ भी कुटिया के बगीचे में रोपे गए हैं।
-- कुटिया के पिछले दरवाजे से निकलकर सीधे बिलावली तालाब की पाल पर पहुंचा जा सकता है।

लिंबोदी से बिलावली तक आश्रम को लीज पर दी गई जमीन का एक सिरा लिंबोदी गांव से शुरू होता है, जबकि दूसरा बिलावली में जाकर खत्म होता है। लिंबोदी कांकड़ पर आम बना है। पीछे की जमीन पर कर्मचारियों के रहने के लिए कमरे बने हैं और उसके पीछे खेती की जा रही है। आसाराम के खेत बिलावली तालाब की पाल तक पहुंच गए हैं।

कार्रवाई का आधार

आम के खिलाफ पहली शिकायत 2008 में की गई थी। इसके बाद फिर 2009 में लीज और उपयोग की जांच हुई। तत्कालीन कलेक्टर ने सीमांकन का आदेश दिया, लेकिन आदेश दबा दिया गया। शनिवार की जांच से प्रारंभिक तौर पर आम पर कार्रवाई का आधार नजर आने लगा है। लीज व्यवसायिक गतिविधियों की इजाजत नहीं देती फिर भी वितरण केंद्र बनाकर उत्पाद बेचे जा रहे हैं।

दो दिन में देंगे रिपोर्ट

एसडीएम विजय अग्रवाल के अनुसार लीज पर मिली 6.869 हेक्टेयर जमीन के अलावा आसाराम द्वारा आसपास की दो एकड़ जमीन भी खरीदी गई है। इस तरह कुल करीब साढ़े आठ हेक्टेयर जमीन आम के पास होना चाहिए। नपती के बाद हिसाब होगा तो पता चलेगा कि आम के पास कितनी जमीन ज्यादा है। अभी हम यह भी देख रहे हैं कि कितने हिस्से पर निर्माण किया गया है। नपती के बाद रिकॉर्ड में यह भी जांचा जाएगा कि जमीन के उपयोग की शर्ते क्या हैं और उसका मौजूदा उपयोग किस तरह हो रहा है। दो दिन में पूरी रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर को सौंपी जाएगी।
Source : http://www.bhopalsamachar.com/2013/09/blog-post_4301.html
 

साजिश नहीं है, स्वयं शनिदेव कर रहे हैं आसाराम के पापों का हिसाब

साजिश नहीं है, स्वयं शनिदेव कर रहे हैं आसाराम के पापों का हिसाब

आसाराम बड़ा नाम था। नाम तो बड़ा अब भी है लेकिन वजह बदल चुकी है। भक्ति के लिए जाने जाने वाले आसाराम को अंदाज़ा ही नहीं रहा कि आखिर वो कब क्या कर रहे हैं और लोगों को धार्मिक आध्यात्मिक संदेश देने वाले इस कथित धर्मगुरू को इस बात का भी अंदाज़ा नहीं रहा कि हर शनिवार उसके पापों का हिसाब हो रहा है।

31 अगस्त की आधी रात ही आसाराम की इंदौर आश्रम से गिरफ्तारी हुई लेकिन क्या ये संयोग है कि ये शनिवार की ही रात थी

आसाराम का शनि कांड सिर्फ़ इसी साल हुई गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है। साल 2008 को याद कीजिये। अहमदाबाद के साबरमति आश्रम में दीपेश और अभिषेक नाम के बच्चों की गुमशुदगी के दो दिन बाद 5 जुलाई को ही उनका शव आश्रम से मिला। वो दिन भी शनिवार का ही था।

जाहिर है कि जुलाई 2008 से ही आसाराम के शनि कांड की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन लाखों भक्तों के भगवान बनने के चक्कर में आसाराम मद में सब भूल गए। उन्हें इन बातों का भी अंदाज़ा नहीं रहा कि वो किसे क्या बोल रहे हैं। राहुल पर आसाराम ने बयान तो दे दिया लेकिन उसके बाद आए शनिवार को आसाराम को एक बार फिर बड़ी चेतावनी मिली। 2 जुलाई को शनिवार को सबसे बड़ी चेतावनी जो दिग्विजय सिंह की थी।

लेकिन आसाराम किसी बात की परवाह नहीं कर रहे थे। वो अपने कथित आत्मिक अनुभव के नाम पर कभी कुटिया तो कभी बाहर मैदानों में ऐसे काम कर रहे थे जिन्हें कोई भी इंसान किसी भी लिहाज से सही नहीं ठहरा सकता। साल 2012 में आसाराम ने फिर वो काम किया। आसाराम ने यूपी के गाज़ियाबाद में पत्रकार पर हमला किया और उससे अगले शनिवार यानी 3 सितंबर, 2012 को दर्ज़ हुआ केस। आसाराम खुद को कभी कृष्ण, कभी राम तो कभी किसी और विष्णु अवतार में पेश करते रहे और इन धार्मिक रूपों के बीच चलती रही वो घिनौनी वारदात जिनके कांड उभरकर शनिवार को आसाराम को सलाख़ों के पीछे धकेल रहे हैं।

जनवरी 2013 की शुरुआत में ही आसाराम ने ऐसे बयान देने शुरु कर दिए कि उसके काले कारनामों को डर की वजह से छिपाए रखने वाली बेटियों के दिलों में नफ़रत की आग सुलग उठी और अगस्त आते आते उनके ख़िलाफ पहली रेप की एफआआर दर्ज हुई और फिर आया शनिवार।

24 अगस्त को शनिवार का ही दिन था जब पहली बार राष्ट्रीय महिला आयोग ने रेप के मामले में कार्रवाई के लिए सक्रिय हुआ। इसी शनिवार के दिन वक़ीलों ने आरोप लगया था कि आसाराम सुबूतों को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं

इसी दिन जोधपुर पुलिस ने भी आसाराम की धरपकड़ के लिए बड़े सुबूत जुटाए क्योंकि इस शनिवार से एक दिन पहले ही आसाराम ने पहली बार भोपाल प्रवचनों के दौरान माना था कि जिस लड़की ने उनके ख़िलाफ शिकायत की है वो उससे आश्रम में मिले थे।

आसाराम की बयानबाज़ी काम नहीं आई और 24 अगस्त शनिवार के दिन ही जोधपुर पुलिस ने सुबूत जुटाकर एक और मुकद्दमा दर्ज कर दिया। आसाराम पर चंगुल ऐसा बढ़ना शुरु हुआ कि आसाराम ने इंदौर भागने में भलाई समझी लेकिन वो नहीं जानते थे कि इंदौर में भी उनके ख़िलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। रविवार से शुक्रवार तक इन छह दिनों तक आसाराम किसी न किस तरह से पुलिस की गिरफ्त से बचते रहे. इस बीच उन्होंने खुद के लिए सफाइयां भी दीं। उन्हें लगा कि बच जाएंगे लेकिन तभी आया शनिवार का दिन।

31 अगस्त को भी शनिवार ही था जब जोधपुर से चली पुलिस की टीमें इंदौर पहुंच चुकी थीं। आसाराम अपने आश्रम में दुबके पुलिस से बच रहे थे। शाम होते होते आसाराम के बेटे नारायण साईं बाहर आए और उसने दावा किया कि उसके बापू आसाराम निर्दोष हैं और जल्द सामने आएंगे।

लेकिन रेप के आरोपों से घिरे आसाराम की कोई दलील काम नहीं आने वाली थी आखिरकार शनिवार की रात गहराने के साथ ही पुलिस ने छापेमारी और तफ़्तीश जारी रखी और आसाराम को इंदौर आश्रम के बिल से बाहर निकाल लिया गया।

31 अगस्त शनिवार की आधी रात हुई इस गिरफ्तारी के बाद आसाराम की हक़ीकत पूरी दुनिया के सामने आ गई.अगले दिन पुलिस आसाराम को लेकर जोधपुर पहुंची तो एक दिन की रिमांड में ही साफ हो गया कि आसाराम उत्तेजना से भरे हैं क्योंकि मेडिकल एक्सपर्ट्स की टीम ने उनके 74 साल की उम्र में भी सेक्सुअली एक्टिव होने की बात पर मुहर लगा दी। आसाराम का दिन फिरने शुरु हो चुके थे क्योंकि इस बार उनकी गिरफ्तारी हुई थी शनिवार की रात को। कहते है शनि इंसाफ करता है। पापों का इंसाफ और कुछ ऐसा ही आसाराम के साथ हो रहा हैष आसाराम के पापों का घड़ा भी हर शनिवार को ही छलक रहा है। शनिवार आया नहीं कि एक नई आफत आसाराम के आगे मुंह बाए खड़ी हो जाती है ।

31 अगस्त को भी शनिवार था और आखिकार वो दिन भी आ गया जब शनिवार के दिन ही जोधपुर में पहली बार बापू गिरफ्तार हुए। 7 सिंतबर को भी शनिवार था जब गैरकानूनी तरीके से बने इंदौर आश्रम मे एसडीएम के अमले और आलां प्रशासन ने धावा बोल दिया। खुलासा हुआ कि आसाराम ने जिस ज़मीन को दिग्विजय सिंह के शासनकाल में औषधि उद्यान विकसित करने के लिए जो 6 एकड़ जमीन ली थी। उस ज़मीन पर अवैध तौर पर निर्माण किया जा चुका है.लैंड यूज़ चेंज़ करने के आरोपों के साथ ही सरकारी कार्रवाई भी तुरंत हुई।

7 सितंबर को को भी शनिवार का ही दिन था जब आसाराम बापू का बेहद ख़ास माने जाने वाला चेला शिवा गिरफ्तार किया गया। शिवा की गिरफ्तारी के बाद ही खुलासा हुआ कि आसाराम बापू को शिल्पी के बेहद चिंता सता रही है। बताया गया कि आसाराम ने शिवा से मिलते ही सबसे पहले शिवा से शिल्पी के बारे में पूछा। वही शिल्पी जिससे अवैध संबंदों को लेकर कई दिनों से आसाराम के चर्चे थे।कैलेड़र का हर शनिवार बापू के साथ साये की तरह थाऔर बापू के कारनामों की पोल खोलता जा रहा है।

22 सिंतबर को भी दिन शनिवार ही था जब आसाराम को इस शनिवार ही उनके रसोईये प्रकाश और शरतचंद्र के संरेडर करने की खबर मिली थी और बापू के चेहरे पर फिर आफत का पसीना टप टप बह रहा था।

28 सिंतबर को भी दिन शनिवार ही था जब एक बार फिर आसाराम के दरवाज़े पर शनिवार ने दस्तक दी और पल भर में ही इंदौर में बना आसाराम बापू का स्वागत द्रार मध्यप्रदेश सरकार ने जमीदोज़ करा डाला। उफ ये शनिवार लेकिन ये तो महज़ एक ही दिन था। समय का पहिया फिर घूमता गया और बापू की हाफ़ पिक्चर में एक और शनिवार ने दस्तक दे डाली।

आसाराम की ज़िंदगी में शनिवार नासूर बनता जा रहा है। कोई कहता है कि ये शनि की दशा का असर है.कोई इसे पापों का फल बता रहा है। लेकिन सच यही है कि शनिवार की सुबह से रात होते होते आसाराम कहीं-न कहीं शिकार बन रहे हैं। न तो उनका जप काम आ रहा है।न गुफाओं में बैठकर की गई साधना काम आ रही है। न ही मंच पर दिए गीता-पुराणों के संदेश। शनिवार की सुनामी आते ही आसाराम के कर्म उफनकर सामने आ जाते हैं और कानून की ऐसी बड़ी लहरें उठती हैं कि आसाराम उसमें समाए चले जाते हैं।

26 अक्टूबर भी शनिवार है और सवाल उठ रहे है कि उस दिन क्या होगा। ये सवाल आसाराम बापू भी दिन रात सोच रहे हैं और उनके बचे-खुचे भक्त भी क्योंकि 25 अक्टूबर तक की न्यायिक हिरासत में हैं आसाराम और अगर वो हिरासत नहीं बढ़ी तो 26 अक्टूबर के बाद के दिन भी आसाराम को जेल की कोठरी में ही बिताने पड़ेंगे।

आसाराम की ज़िंदगी का चक्रव्यूह बुरी तरह से शनिवार की चपेट में है। कभी संत खुद गिरफ्तार होता है। कभी उसके बेटे पर गिरप्तारी की तलवार लटकती है और कभी उसके ख़ास शिवा और हमराज़ शिल्पी एक एक कर जेल की सलाखों के पीछे अपने सीने में दफ़न राज़ों को उगलना शुरु कर देती हैं आखिर आसाराम की ज़िंदगी में क्या क्या करेगा शनिवार?
Source : http://www.bhopalsamachar.com/2013/10/blog-post_4597.html
 

पीड़िता से ओरल सेक्स चाहते थे आसाराम बापू

पीड़िता से ओरल सेक्स चाहते थे आसाराम बापू

भोपाल: यौन उत्पीडऩ के मामले में फंसे अध्यात्मिक गुरू आसाराम बापू पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली नाबालिग लड़की का कहना है कि बापू ने जब उसके कपड़े उतारे तभी घटना के बारे में किसी को न बताने की धमकी भी दी।

मामले की जांच कर रही टीम के स्रोतों के अनुसार आसाराम ने नाबालिग से ओरल सेक्स करने को भी कहा था, लेकिन वो नहीं मानी।

हालांकि सूत्रों के अनुसार आसाराम ने नाबालिग लड़की के कमर से नीचे के कपड़े नहीं उतारे। सूत्रों का यह भी कहना है कि पीड़ित की शिकायत और बयान में बलात्कार का उल्लेख नहीं है। अभी तक की जांच में यही सामने आया है कि यह घटना 15 अगस्त की रात 10 बजे जोधपुर शहर से करीब 40 किमी दूर की है।

पीड़ित लड़की आसाराम द्वारा मध्यप्रदेश में चलाए जा रहे एक स्कूल की छात्रा है और उसके माता-पिता आसाराम से लड़की के इलाज के सिलसिले में मिले थे। जोधपुर के उस आश्रम में मुलाकात की जगह पर काफी अंधेरा था और लड़की के माता-पिता को गेट के बाहर की खड़े रहने को कहा गया था। लड़की को अकेले ही अंदर ले जाया गया।

आसाराम को कुछ धार्मिक क्रियाओं से लड़की का इलाज करना था। माता-पिता ने बताया कि वह समझ रहे थे कि इलाज के लिए होने वाले धार्मिक अनुष्ठान ग्राउण्ड फ्लोर के बाहर की बालकनी में ही होंगे जबकि लड़की ने अपने बयान में कहा है कि उसे पिछले दरवाजे से कमरे में ले जाया गया।

इसकी पुष्टि जांच में जुटी टीम ने भी की है। कमरे से बाहर आकर लड़की ने अपने माता-पिता को सबकुछ बताया। लड़की ने कहा, 'उन्होंने मेरी कमीज उतारी और मेरे बदन को यहां-वहां पुचकारने लगे। आध्यात्मिक गुरु ने इससे पहले यौन संबंध के लिए भी पहल की थी जिससे लड़की ने इनकार कर दिया था। 
 
Source : http://www.bhopalsamachar.com/2013/08/blog-post_2055.html
 

कोई तो बताए.. आखिर आसाराम बापू को गुस्सा क्यों आता है

कोई तो बताए.. आखिर आसाराम बापू को गुस्सा क्यों आता है
नई दिल्ली।
कहते हैं कि संतों को क्रोध करना शोभा नहीं देता। लेकिन ऐसा क्यों होता है कि संत आसाराम बापू को गुस्सा आ जाता हैं। वैसे तो देश के लाखों भक्तों के बीच आसाराम बापू की छवि एक सदभावी संत और सन्यासी की है। लेकिन जब आसाराम बापू पर आरोप लगते हैं या उन्हें जबरदस्ती नियमों का पालन करने का दबाव डाला जाता है तो भक्तों के साथ साथ खुद आसाराम बापू को भी गुस्सा आ जाता है। पिछले दिनों ऐसे ही विमान में सीट बैल्ट बांधने के आग्रह पर आसाराम बापू गुस्सा हो गए थे। इससे पहले भी कई बार आसाराम गुस्साए हैं।
आश्रम पर सवाल पूछो तो आता है गुस्सा आसाराम पर पिछले साल आरोप लगाया गया कि उनके आश्रम में दो बच्चों की मौत के जिम्मेदार वो हैं। अहमदाबाद स्थित आसाराम के आश्रम में दो बच्चों की संदिग्ध मौत हो गई थी। इस संबंध में आसाराम और उनके बेटे नारायण सांई के खिलाफ मामला चल रहा है। आफत ये है कि जब भी आसाराम बापू से इस संबंध में बात की जाती है वो गुस्सा हो जाते हैं। उन्हें बहुत क्रोध आता है ये सफाई देते हुए कि बच्चों की मौत के लिए वो जिम्मेदार नहीं।
बेटे की बुराई सुनकर आता है गुस्सा संत और सन्यासी होने के बावजूद आसाराम बापू पुत्र मोह के शिकार हैं। जब उनके बेटे नारायण सांई पर गुजरात के हिम्मतनगर में जमीन घोटाले के आरोप लगे तो आसाराम बापू बौखला गए। उन्होंने विरोधियों और मीडिया पर जमकर गुस्सा उतारा।
रामदेव को सताया तो गुस्सा आया कालेधन पर आंदोलन करने वाले बाबा रामदेव पर पुलिसिया कार्रवाई पर आसाराम बापू को जबरदस्त गुस्सा आया। इसी कारण उन्होंने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ जमकर बयानबाजी की। रायपुर में प्रवचन के दौरान आसाराम बापू ने कहा कि संतों को सताने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि रामदेव पर अत्याचार करने वाली सोनिया को देश छोड़कर चले जाना चाहिए।
नियम का पालन करने में आता है गुस्सा बापू यूं तो भक्तों से नियम और संयम का पालन करने को कहते हैं लेकिन असल जीवन में नियमों का पालन नहीं करते। तीन दिन पहले जब बापू इंडिगो विमान से वडोदरा से दिल्‍ली आ रहे थे तो उन्होंने नियमों की बात पर विमान में ही जमकर हंगामा किया।  सूत्रों के मुताबिक चेक इन काउंटर पर देरी से पहुंचने की वजह से उन्‍हें काउंटर पर तैनात कर्मचारी ने बोर्डिंग पास देने से इनकार कर दिया। इस पर बापू के समर्थकों ने हंगामा कर दिया जिसके बाद उन्‍हें बोर्डिंग पास दे दिया गया। यही नहीं विमान के क्रू मेंबर ने जब उनसे सुरक्षा हेतु सीट बैल्ट बांधने को कहा तो गुस्से से लाल पीले होकर बापू छाती तक पीटने लगे।
सवाल -क्या आपको लगता है आसाराम बापू को जायज चीजों पर गुस्सा आता है? क्या संत होने के नाते उनका गुस्सा सही है?

दुष्कर्म अपराध ही होता है, गलती नहीं

दुष्कर्म अपराध ही होता है, गलती नहीं

दुष्कर्म अपराध ही होता है, गलती नहीं
संदर्भ का बहुत महत्व होता है। हम जो कहते हैं और हमारा जो आशय होता है वह बहुत कुछ इस बात पर निर्भर होता है कि कब, कहां और कैसे हमने इसे कहा है। हालांकि कभी-कभार ऐसी भी स्थिति होती है कि कही गई बात अपने आप में इतनी स्पष्ट होती है कि उसे समझने के लिए संदर्भ की जरूरत नहीं होती। जैसे शक्ति मिल दुष्कर्म मामले में मुलायम सिंह यादव का बयान। यहां यह साफ कहना होगा कि दुष्कर्म अपराध ही होता है, कोई 'गलतीÓ नहीं और उसकी सजा मिलनी ही चाहिए।
हालांकि मैं और कई अन्य नारीवादी दुष्कर्म मामले में मौत की सजा के खिलाफ हैं। हम दोषियों को दंडित करने के विरोधी नहीं है बल्कि राज्य द्वारा गलत तरीके से जान लेने का अधिकार लेे लेने के खिलाफ हैं। दुनियाभर के आंकड़े बताते हैं कि मौत की सजा पाने वालों में गरीब और अल्पसंख्यक तबकों के लोगों का अनुपात ज्यादा है। दिल्ली और शक्ति मिल दुष्कर्म घटनाओं के बाद मीडिया ने लगातार दुष्कर्मियों की गरीब व वंचित पृष्ठभूमि पर फोकस किया। इससे चाहे-अनचाहे यह संदेश गया कि निम्न तबके के पुरुष ही ऐसे अपराध करते हैं।
हाल में मुलायम और अबु आजमी के बयानों की वाम व दक्षिणपंथी हर विचारधारा के लोगों ने आलोचना की। इसके पहले भी ऐसे बयान आए हैं। आसाराम बापू  ने कहा था कि पीडि़ता ने दुष्कर्मी को भाई कहा होता तो घटना नहीं होती। खाप पंचायत के जितेंदर छत्तर ने कहा था कि चाऊमिन खाने से हार्मोन का असंतुलन होता है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं होती हैं। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ननकीराम ने कहा था कि वजह ग्रहों की स्थिति है। इन बयानों को महिलाओं के कपड़ों पर मर्यादा बांधने, उन्हें सेलफोन न देने या उन्हें घर में नजरबंद रखने जैसे आह्वानों के साथ रखकर देखा जा सकता है।
इससे भी खतरनाक तो प्रगतिशील होने के नाम पर दी जा रहीं दलीलें हैं। हाल ही में एक ख्यात लेखिका ने तरुण तेजपाल के मामले में पीडि़ता की गवाही पर ही सवाल उठा दिए। एक अन्य मामले में बैलेंस्ड स्टोरी के नाम पर न सिर्फ पीडि़ता की पहचान को खतरे में डाल दिया गया बल्कि उसकी गवाही पर सफलतापूर्वक प्रश्न चिह्न लगा दिया गया। गौरतलब है कि ये दोनों लेख सीसीटीवी फुटेज पर आधारित हैं, जो अदालत के निर्देशों के अनुसार इन तक नहीं पहुंचने चाहिए थे। नेटवर्क ऑफ वुमन इन इंडिया ने प्रेस काउंसिल और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया में शिकायत की कि यह पत्रकारिता के नैतिक मानदंडों के खिलाफ है और यह मामले को प्रभावित करने का सोचा-समझा प्रयास हो सकता है।
इस तरह नारीवादियों के सामने चुनौती सिर्फ नेताओं के बेतुके बयानों का विरोध करने की नहीं है। कई लोग जोर देकर कहेंगे कि कमजोर वर्ग की पृष्ठभूमि वाले अपराधी सजा पाने के हकदार हैं। लेकिन कठिन पर उतना ही महत्वपूर्ण है तरुण तेजपालों के विशेषाधिकारों का बचाव करने वाली आवाजों का विरोध। ऐसा इसलिए कि मुलायम जैसे बयान और तेजपाल के मामले में पीडि़ता को दोषी ठहराने के प्रयास उसी संदर्भ के दो पहलू हैं कि यदि महिला पर हमला हुआ है तो उसी ने ऐसा कुछ किया होगा।
लेखिका टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में असिस्टेंट प्रोफसर हैं।
Source : http://www.bhaskar.com/article/ABH-shilpa-phadke-column-mulayam-singh-yadavs-statement-4582603-NOR.html
 

गुजरात में पोस्टरवार: केजरीवाल को बताया आसाराम के समान

गुजरात में पोस्टरवार: केजरीवाल को बताया आसाराम के समान

गुजरात में पोस्टरवार: केजरीवाल को बताया आसाराम के समान
अहमदाबाद: गुजरात में गर्मा रहे चुनावी माहौल के बीच अहमदाबाद में आज कई प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल को जेल में बंद विवादास्पद धर्मगुरू आसाराम बापू के समान बताने वाले अनाम पोस्टर लगे पाए गए। इनमें आप और केजरीवाल को लोकतंत्र तथा सत्ता के विकेंद्रीकरण का विरोधी भी बताया गया है। इन अनाम पोस्टरो में यह भी कहा गया है कि अन्ना हजारे का साथ छोडऩे वाले केजरीवाल का मिशन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को सरकार बनाने से रोकना भी है ताकि केंद्र में एक अस्थिर सरकार बने।

उधर आप के राज्य संयोजक सुखदेव पटेल ने इसके पीछे मुद्दाविहीन राजनीतिक दलों के हिमायतियों का हाथ होने का संदेह जताते हुए दावा किया कि जनता सब समझती है और आगामी चुनाव में ऐसा करने वालों के खिलाफ प्रतिक्रिया देगी। नगर के सरदार पटेल स्टेडियम रोड, अंकुर चौराहा और वापुर तालाब रोड समेत कुछ अन्य इलाकों में आज सुबह लगे इन पोस्टरों में लिखा गया था कि जैसे आसाराम ने भक्तों को धोखा दिया वैसे ही केजरीवाल ने देशभक्तों को गुमराह करने का काम किया है। इसलिए दोनो एकसमान हैं। अगर उन्हें सच्चाई की लड़ाई ही लडऩी थी तो अन्ना का साथ क्यों छोड़ा। इनमें अंग्रेजी में लिखा गया है सावधान इंडिया।

आप का मिशन 2014 है मोदी को 272 के आंकड़े को पार करने से रोकना ताकि देश में अस्थिर सरकार रहे। उधर पटेल ने कहा कि कुछ समय पहले हिन्दू महासभा ने भी ऐसी ही पोस्टरबाजी की थी। जिनमें आप को हिन्दू विरोधी बताया गया था पर उस समय भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर ऐसा हुआ होता तो इस तरह की घटना फिर नहीं होती। वैसे जनता समझदार है और मुद्दाविहीन राजनीतिक दलों की भ्रम फैलाने वाली इस तिकड़म को समझती है। वह इसके खिलाफ प्रतिक्रिया देगी।
Source : http://www.punjabkesari.in/news/article-233734

 

गुजरात में केजरी-आसाराम एक समान के पोस्टर

गुजरात में केजरी-आसाराम एक समान के पोस्टर
अहमदाबाद। गुजरात में गर्मा रहे चुनावी माहौल के बीच अहमदाबाद में कई प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को जेल में बंद विवादास्पद धर्मगुरू आसाराम बापू के समान बताने वाले अनाम पोस्टर लगे पाए गए। इनमें आप और केजरीवाल को लोकतंत्र और सत्ता के विकेंद्रीकरण का विरोधी भी बताया गया है। इन अनाम पोस्टरों में यह भी कहा गया है कि अन्ना हजारे का साथ छोड़ने वाले केजरीवाल का बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने से रोकना भी है ताकि केंद्र में एक अस्थिर सरकार बनें।
नगर के सरदार पटेल स्टेडियम रोड अंकुर चौराहा और वस्त्रापुर तालाब रोड समेत कुछ अन्य इलाकों में लगे इन पोस्टरों में लिखा गया था कि जैसे आसाराम ने भक्तों को धोखा दिया वैसे ही केजरीवाल ने देशभक्तों को गुमराह करने का काम किया है। इसलिए दोनो एकसमान हैं। अगर उन्हें सच्चाई की लड़ाई ही लड़नी थी तो अन्ना का साथ क्यों छोड़ा। इनमें अंग्रेजी में लिखा गया है सावधान इंडिया आप का मिशन 2014 है मोदी को 272 के आंकड़े को पार करने से रोकना ताकि देश में अस्थिर सरकार रहे।
उधर पटेल ने कहा कि कुछ समय पहले हिन्दू महासभा ने भी ऐसी ही पोस्टरबाजी की थी (जिनमें आप को हिन्दू विरोधी बताया गया था) पर उस समय भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर ऐसा हुआ होता तो इस तरह की घटना फिर नहीं होती। वैसे जनता समझदार है और मुद्दाविहीन राजनीतिक दलों की भ्रम फैलाने वाली इस तिकड़म को समझती है। वह इसके खिलाफ प्रतिक्रिया देगी।
Source : http://khabar.ibnlive.in.com/news/118633/12
 

दुष्कर्म मामला : अभियोजन की दलीलें पूरी, आसाराम बीमार

दुष्कर्म मामला : अभियोजन की दलीलें पूरी, आसाराम बीमार

जोधपुर : एक किशोरी पर स्वंयभू धर्मगुरु आसाराम बापू के कथित हमले के मामले में अभियोजन पक्ष ने सोमवार को अपनी दलीलें पूरी कर ली. लोक अभियोजक आरएल मीणा ने बताया, हमने अपनी दलीलें पूरी कर लीं. बचाव पक्ष 25 अप्रैल को जिरह करेगा.
मीणा ने कहा कि पीडि़ता की जांच 15 अप्रैल को पूरी हो चुकी थी, लेकिन उसने जोधपुर जिला एवं सत्र अदालत में मामले से जुड़ी तसवीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग का सत्यापन किया. 11 अप्रैल को पीडि़ता भावुक होकर अदालत से कहा था कि आसाराम ने उसके साथ अनैतिक कृत्य किया, जिस पर उसने और उसके परिजनों ने भरोसा किया. उसने पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष दिये गये अपने बयानों का भी जिक्र किया. अदालत बचाव पक्ष की पहली गवाह, दिल्ली की कमला मार्केट पुलिस की सहायक उपनिरीक्षक पुष्पलता की जिरह जारी रखेंगी, जहां पीडि़ता ने प्राथमिकी दायर की थी और अपने बयान दर्ज कराये थे.
* आसाराम बीमार
आसाराम की हालत उस वक्त बिगड़ गयी, जब वह अदालत कक्ष में दाखिल हुए. स्वंयभू धर्मगुरु को वापस जेल ले जाया गया. जेल के डॉक्टरों ने आसाराम का प्राथमिक चेक-अप किया. इसके बाद स्वंयभू धर्मगुरु को आयुर्वेद विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अस्पताल ले जाया गया. किशोरी पर यौन हमला का मामला दर्ज होने के बाद आसाराम पिछल साल के दो सितंबर से ही जेल में हैं
Source : http://www.prabhatkhabar.com/news/108501-Misdemeanor-case-prosecution-arguments-Asaram-sick.html

Asaram Bapu case: Prosecution completes arguments in Jodhpur District and Sessions court

Asaram Bapu case: Prosecution completes arguments in Jodhpur District and Sessions court
The prosecution today completed its arguments in the case of alleged sexual assault of a teenage girl by self-styled godman Asaram Bapu.
 The prosecution today completed its arguments in the case of alleged sexual assault of a teenage girl by self-styled godman Asaram Bapu

JODHPUR: The prosecution today completed its arguments in the case of alleged sexual assault of a teenage girl by self-styled godman Asaram Bapu.

"We completed our arguments today... The defence will cross-examine the girl on April 25," said public prosecutor R L Meena.

He said examination of the girl was completed on April 15, but today some photographs and video recordings pertaining to the case were verified by her in the Jodhpur District and Sessions Court. On April 11, the girl had turned emotional and had said in the court that the person, whom she and her parents trusted, did such an immoral behaviour with her. She had also recounted her statements given to the police and magistrate.

The court, however, will continue with cross-examination of the first prosecution witness Pushplata, ASI of the Kamla Market police station in Delhi, where the victim had lodged the Zero FIR, and had got her statements recorded. So far five witnesses have appeared in the court, out of total 58 to be examined, the list of which had been submitted to the court by the prosecution.

Meanwhile, the condition of Asaram deteriorated soon after he entered the courtroom. He was taken back to the jail. After preliminary check-up by jail doctors, Asaram was taken to the Ayurveda Hospital of the Ayurveda University here. Asaram is lodged in the Jodhpur Central Jail since September 2 last year after he was booked for the sexual assault on the girl.
 Source : http://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/asaram-bapu-case-prosecution-completes-arguments-in-jodhpur-district-and-sessions-court/articleshow/34048590.cms

Friday, 11 April 2014

आसाराम की तीसरी जमानत याचिका खारिज

आसाराम की तीसरी जमानत याचिका खारिज
जोधपुर: जोधपुर की जिला एवं सत्र अदालत ने आज यहां प्रवचन करने वाले आसाराम की तीसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। उन्होंने स्वास्थ्य आधार पर जमानत की मांग की थी। लोक अभियोजक आर एल मीणा के अनुसार आसाराम ने स्वास्थ्य के आधार के अलावा अन्य कारणों के आधार पर जमानत की मांग की थी। उन कारणों का पिछली जमानत याचिकाओं में उल्लेख किया गया है।

मीणा ने कहा, ‘लेकिन हमने आपत्ति जताई और उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट पेश की। वह सामान्य है।’ जोधपुर जिला अदालत के न्यायाधीश मनोज कुमार व्यास ने परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं होने और आसाराम के मामले में मुकदमा शुरू हो जाने के मद्देनजर जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले दो अवसरों पर उच्च न्यायालय ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
Source :  http://zeenews.india.com/hindi/news/state/court-rejects-asaram-bapu-s-third-bail-plea/206679

JDA demolishes part of Asaram's ashram from govt land

JDA demolishes part of Asaram's ashram from govt land

Jaipur, Mar 25 (PTI) Jaipur Development Authority today removed encroachments, including part of an ashram of self-styled godman Asaram Bapu, from a government land at Goner road here.

The land was encroached for self-styled godman Asaram Bapu's ashram and a team today removed the portion of the ashram from the land, official sources said.

The authority had sealed the Ashram last week, they said.

The controversial godman is lodged at Central Jail Jodhpur?on charges of sexually assaulting a minor girl.
Source : http://www.ptinews.com/news/4539090_JDA-demolishes-part-of-Asaram-s-ashram-from-govt-land.html
 

देश को साफ सुथरी सरकार चाहिए: श्री रविशंकर

देश को साफ सुथरी सरकार चाहिए: श्री रविशंकर
फर्रुखाबाद (एसएनएन): आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक एवं आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि देश में खिचड़ी सरकार की जरूरत नहीं बल्कि एक स्वच्छ छवि वाली मजबूत सरकार की जरूरत है. देश के जागरूक मतदाताओं को चाहिए कि वे जातिवाद से ऊपर उठकर स्वच्छ छवि वालों को चुनें. देश के सभी राजनेता भ्रष्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि जो मुख्यमंत्री अपने दायित्वों को नहीं निभा सका, उसे अनुभवहीन ही कहा जाएगा. उन्होंने कहा कि आज देश में भ्रष्टाचार और अपराधियों की गंदगी छाई हुई है जिसे संसद तक न पहुंचने देने के लिए जनता को अच्छे व्यक्ति को चुनना होगा.
रविशंकर ने अच्छी छवि वाले राजनेताओं को चुनने के लिए जनता से शत प्रतिशत मतदान करने की अपील की. रविशंकर कल देर रात आयोजित एक आध्यात्मिक सत्संग समारोह को संबोधित करने के उपरान्त पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि धर्मगुरू कभी भी जनता का हक नहीं छीनते. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस तरह शंकराचार्य निर्दोष साबित हुए ऐसे ही बापू आसाराम को भी न्यायालय से राहत मिलेगी. उन्होंने कहा कि आसाराम बापू के किसी भी गवाह पर तेजाब फेंका जाना अनुचित है. रविशंकर ने एक अन्य सवाल के जवाब में यह माना कि आर्ट ऑफ लिविंग संस्था में कुछ भ्रष्ट लोग जुड़ गए हैं.

Source : http://www.shrinews.com/DetailNews.aspx?NID=34031
 

आसाराम बापू और सुब्रत राय सहारा के मामले में एक गजब की समानता

subrato roy sahara
आसाराम बापू और सुब्रत राय सहारा के मामले में एक गजब की समानता देखी गई। वह यह कि अपने - अपने क्षेत्र के इन दोनों दिग्गजों पर जब कानून का शिकंजा कसना शुरू हुआ , तो दोनों ने पहले इसे काफी हल्के में लिया। उनके हाव - भाव से यही लगता रहा कि इनकी नजर में एेसी बातों का कोई महत्व नहीं है। उनके प्रताप से कानून की सारी कड़ाई धरी रह जाएगी। लेकिन कमाल देखिए कि एक बार ये कानून के शिकंजे में फंसे तो फिर इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता फिलहाल इन्हें या इनके कुनबे को नहीं सूझ रहा। कुछ एेसा ही हाल 1990 के दशक में फिल्म अभिनेता संजय दत्ता का रहा था। मुंबई दंगों के दौरान घर में अवैध असलहा रखने के मामले में कानून ने जब संजय को गिरफ्त में लेना शुरू किया, तब  शुरू में संजय बिल्कुल बेपरवाह नजर आते रहे। पुलिस , अदालत औऱ जेल आदि उन्हें किसी  फिल्म की शूटिंग जैसा लगता रहा। आज भी चैनलों पर कभी - कभी उस दौर के फुटेज दिखाई देते हैं, तो साफ नजर आता है कि तब के अपेक्षाकृत दुबले - पतले संजय दत्त किस तरह लापरवाही से इधर - उधर आ - जा रहे हैं। लेकिन सच्चाई सामने आते ही संजय का जो हाल हुआ उसने उनके बूढ़े पिता को काफी रुलाया। 

अब सहारा प्रकरण में सुब्रत राय सहारा का हश्र सचमुच हैरान करने वाला है। ताजा प्रकरण के जरिए ही कई चैनलों पर सुब्रत राय की शानदार पार्टियों के फुटेज चले, जिसमें फिल्म से लेकर राजनीति औऱ खेल से लेकर विभिन्न क्षेत्रों की कई प्रतिष्टित हस्तियां उनकी पार्टी में शामिल होकर काफी गौरवान्वित नजर आई । इससे पहले दाऊद इब्राहिम की पार्टियों में भी एेसा नजारा देखा जा चुका है। बेशक सेलीब्रिटीज किसी के साथ एेसा रिश्ता खास तौर पर उपकृत होने के बाद ही बनाते हैं। अन्यथा देखा गया है कि जनजीवन में बेहद आत्मीयता व सम्मान के साथ सभा - समारोह में बुलाए जाने पर भी एेसे लोग किस तरह बात - बेबात नाक - भौं सिकोड़ते रहते हैं, औऱ पूरी उपस्थिति के दौरान एेसा साबित करते हैं कि उनके कार्यक्रम में उपस्थित होकर उन लोगों ने संबंधितों को अपना जीवन सुधारने का मौका दिया है। लेकिन  निवेशकों का पैसा लौटाने के मामले में सुब्रत राय की गिरफ्तारी के बाद से यही  ब्रिगेड जिसमें से शत - प्रतिशत एेसी ही पृवत्ति के लोग शामिल हैं, बिल्कुल खामोश है।   

आज जब राय लगातार हिरासत में है, और उनके इस दुष्चक्र से बाहर निकलने की कोेई संभावना नजर नहीं आ रही है। लगता है सुब्रत राय की सेलीब्रिटी  ब्रिगेड ने उनसे दूरी बना कर उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। ताजा घटना भी चकाचौंध पसंद करने वालों के लिए एक सबक के समान है कि सेलीब्रिटीज किसी की नहीं होती। उसे सिर्फ पैसे औऱ पावर से मतलब होता है। यह जिसके पास होता है, सेलीब्रिटीज भी उन्हीं के बगल खड़े होना पसंद करते हैं। यह विडंबना गांव - कस्बे से लेकर राज्यों व देश तक समाज के हर क्षेत्र में फैली हुई है। सामान्य जीवन यापन में भी देखने को मिलता है कि किस तरह किसी के अचानक सफलता हासिल करने पर समाज के हर वर्ग के लोग उसके बगल खड़े होने में गर्व महसूस करते हैं। लेकिन किन्ही कारणों से उसके दुर्दिन शुरू होते ही लोग तत्काल  उससे मुंह भी  फेर लेते हैं।  कथित सफलता के एेसे शिखर की सच्चाई शायद सुब्रत राय को अब तक समझ आ गई होगी। इससे बेहतर तो समाज के निचले स्तर के वे लोग जिन्हें मुसीबत में उनके जानने वाले यूं असहाय नहीं छोड़ते, और जितना संभव हो पाता है, उनका साथ निभाने का भरसक प्रयास करते हैं। 
Source : http://www.liveaaryaavart.com/2014/04/subrato-roy-celebrity-status.html
 

आसाराम प्रकरण: पुलिस अफसर को कोर्ट में बयान से रोका

आसाराम प्रकरण: पुलिस अफसर को कोर्ट में बयान से रोका
 
 
आसाराम प्रकरण: पुलिस अफसर को कोर्ट में बयान से रोका
लखनऊ। दुष्कर्म प्रकरण की गवाही शुरू होते ही आसाराम के गुर्गों ने गवाहों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जोधपुर कोर्ट में बयान को आई दिल्ली पुलिस की एएसआइ पुष्पलता को भी उन्होंने नहीं बख्शा। कोर्ट जाने से रोकने के लिए गुर्गो ने वहां जमकर हंगामा किया। इस मामले में जोधपुर पुलिस ने 129 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है।
शाहजहांपुर में पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी के केस में 19 मार्च को दिल्ली पुलिस की एएसआइ पुष्पलता की गवाही होनी थी। आसाराम के गुर्गों ने जाल बिछाकर उन्हें गवाही से रोकने की कोशिश की। उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। इससे गवाही देर से शुरू हो सकी। जोधपुर पुलिस ने मामले में 129 लोगों को पाबंद कर कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को एएसआइ निरपाल सिंह के साथ पुष्पलता की गवाही पूरी की गई।
लखनऊ में गवाह पर कार से हमला
लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में रह रहे आसाराम के पूर्व सचिव और जोधपुर, अहमदाबाद और सूरत केस के प्रमुख गवाह राहुल के सचान पर कार से जानलेवा हमला किया। राहुल ने जागरण को बताया कि प्लानिंग के तहत सफेद रंग की टाटा इंडिगो की नंबर प्लेट पर मिट्टी लगाकर हमला किया गया। ठाकुरगंज थाने में जब उन्होंने मामले की सूचना दी और एफआइआर का आग्रह किया तो पुलिस ने उल्टा उन्हें ही जेल भेजने की धमकी देकर भगाने की कोशिश की। जब अहमदाबाद की एसीपी कानन देसाई से फोन पर वार्ता कराई तब जाकर पुलिस ने शिकायत दर्ज की। शिकायत में राहुल ने आसाराम, उनकी पत्‍‌नी लक्ष्मी, पुत्री भारती, पुत्र नरायण साई और जमानत पर रिहा हुए शिवा को आरोपी बनाया है। कहा कि इन्हीं के इशारे पर अज्ञात लोगों ने जान से मारने का प्रयास किया।
टॉप मोस्ट में राहुल
राहुल ने बताया कि सूरत में तेजाब हमले में गिरफ्तार लोगों के पास मिली लिस्ट में सबसे ऊपर उनका नाम है। राहुल ने बताया कि सूरत पुलिस ने यह जानकारी देकर सतर्क और सुरक्षित रहने की सलाह दी है।
गवाहों को सुरक्षा देने की मांग
पीड़िता के पिता ने कहा कि जबसे शिवा, शिल्पी समेत चार सह आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आए, हमले तेज हो गए। बताया कि महीने भीतर सूरत में तीन हमले हुए, अब जोधपुर कोर्ट में एएसआइ को गवाही को रोकने का प्रयास किया गया। लखनऊ में राहुल सचान को जान से मारने की धमकी के तीसरे दिन कार से कुचलने की कोशिश की गई। उन्होंने प्रकरण में बेटी के पक्ष के सभी 58 गवाहों को कड़ी सुरक्षा देने की मांग की है।

Source : http://www.jagran.com/news/state-obstacle-in-asaram-issue-11172459.html

आसाराम प्रकरण में पीड़िता के गवाह को खतरा बढ़ा

आसाराम प्रकरण में पीड़िता के गवाह को खतरा बढ़ा

आसाराम प्रकरण में पीड़िता के गवाह को खतरा बढ़ा
लखनऊ। आसाराम के गुर्गो से आंख बचाकर लखनऊ पहुंचे जोधपुर, सूरत और अहमदाबाद दुष्कर्म केस के सरकारी गवाह को खतरा बढ़ गया है। सूरत और अहमदाबाद के पुलिस अधिकारियों के आग्रह के बावजूद यूपी पुलिस ने सरकारी गवाह को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई है।
ताजा मामला जुड़ा है आसाराम के मुख्य राजदार और पूर्व सचिव राहुल सचान से। कानपुर निवासी राहुल ने करीब दस वर्ष तक आसाराम के मुख्य सेवादार व सचिव के रूप में व्यवस्थाओं का संचालन किया। शाहजहांपुर की पीड़िता समेत सूरत तथा अहमदाबाद केस में वहां की पुलिस ने राहुल को सरकारी गवाह बनाया है। कानपुर, इलाहाबाद, के बाद जब राहुल ने लखनऊ में ठिकाना बनाया तो वहां भी आसाराम के गुर्गे पहुंच गए। होली के दिन उन्होंने ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में राहुल को कार से कुचलने की कोशिश की। थाने में घटना की सूचना भी दर्ज कराई गई। अहमदाबाद की एसीपी कानन देसाई तथा सूरत के डीसीपी ने लखनऊ के एसएसपी को फैक्स भेजकर सरकारी गवाह राहुल की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने का अपेक्षा की। लेकिन यूपी पुलिस ने कोर्ट के गवाह को सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई।
पुलिस से स्थाई सुरक्षा संभव नहीं
लखनऊ चौक क्षेत्र के सीओ सर्वेश मिश्र ने सूरत और अहमदाबाद के पुलिस अफसरों के फैक्स की पुष्टि की। कहा कि राहुल की सुरक्षा की बाबत एसपी कार्यालय को फैक्स मिला है। गवाह से वार्ता कर सुरक्षा बोध कराया जाएगा। लेकिन स्थाई सुरक्षा देना सरकार का काम है। इसके लिए खुद राहुल को सुरक्षा के लिए आवेदन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि एसओ शशिकांत यादव को सुरक्षा की बाबत दिशा निर्देश दे दिए गए हैं।
फंसाना चाह रही थी पुलिस
पीडि़ता के गवाह व आसाराम के पूर्व सचिव राहुल का कहना है कि उन्हें पुलिस झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने के प्रयास में थी। बताया कि होली के दिन हमले की सूचना दर्ज कराने जब वह ठाकुरगंज थाना पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें घेर लिया और मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी। जब अहमदाबाद की एसीपी कानन देसाई ने वार्ता की, तब जाकर पुलिस ने छोड़ा।

Source : http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-witness-rahul-in-bathration-on-asaram-issue-11203244.html

गुजरात में केजरी-आसाराम एक समान के पोस्टर

गुजरात में केजरी-आसाराम एक समान के पोस्टर
अहमदाबाद। गुजरात में गर्मा रहे चुनावी माहौल के बीच अहमदाबाद में कई प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को जेल में बंद विवादास्पद धर्मगुरू आसाराम बापू के समान बताने वाले अनाम पोस्टर लगे पाए गए। इनमें आप और केजरीवाल को लोकतंत्र और सत्ता के विकेंद्रीकरण का विरोधी भी बताया गया है। इन अनाम पोस्टरों में यह भी कहा गया है कि अन्ना हजारे का साथ छोड़ने वाले केजरीवाल का बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने से रोकना भी है ताकि केंद्र में एक अस्थिर सरकार बनें।
नगर के सरदार पटेल स्टेडियम रोड अंकुर चौराहा और वस्त्रापुर तालाब रोड समेत कुछ अन्य इलाकों में लगे इन पोस्टरों में लिखा गया था कि जैसे आसाराम ने भक्तों को धोखा दिया वैसे ही केजरीवाल ने देशभक्तों को गुमराह करने का काम किया है। इसलिए दोनो एकसमान हैं। अगर उन्हें सच्चाई की लड़ाई ही लड़नी थी तो अन्ना का साथ क्यों छोड़ा। इनमें अंग्रेजी में लिखा गया है सावधान इंडिया आप का मिशन 2014 है मोदी को 272 के आंकड़े को पार करने से रोकना ताकि देश में अस्थिर सरकार रहे।
उधर पटेल ने कहा कि कुछ समय पहले हिन्दू महासभा ने भी ऐसी ही पोस्टरबाजी की थी (जिनमें आप को हिन्दू विरोधी बताया गया था) पर उस समय भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर ऐसा हुआ होता तो इस तरह की घटना फिर नहीं होती। वैसे जनता समझदार है और मुद्दाविहीन राजनीतिक दलों की भ्रम फैलाने वाली इस तिकड़म को समझती है। वह इसके खिलाफ प्रतिक्रिया देगी।

Source : http://khabar.ibnlive.in.com/news/118633/17?from=RHS