'सच का सामना' करें आसाराम
शाहजहांपुर : आसाराम बापू के समर्थन में चल रही लामबंदी से दुष्कर्म पीड़ित छात्रा के पिता खासे आहत हैं। उन्होंने ऐसे अंध भक्तों के लिए चुनौती भी दी है कि अगर घटना झूठी है तो आसाराम 'सच का सामना' करके दिखाएं। मांग उठाई, पुलिस आसाराम का पॉलीग्राफ टेस्ट और ब्रेन मैपिंग कराए। इन मेडिकल टेस्ट से दुनिया खुद ही सच जान जाएगी और झूठ बेनकाब होगा। वह चाहे मैं ही क्यों न हूं।
'जागरण' से बातचीत में पीड़िता के पिता ने कहा कि तमाम वैज्ञानिक विधियां है, जिनके जरिए सच का पता किया जा सकता है। यदि साधक उनकी बेटी को गलत और बापू को सही मानते हैं तो पुलिस यह टेस्ट जरूर कराए। नारको टेस्ट हो। उन्होंने कहा कि उनका परिवार हर तरह की जांच के लिए तैयार है। पीड़िता के पिता ने सीबीआइ जांच पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग आसाराम का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें भी सीबीआइ जांच की मांग करनी चाहिए, ताकि सत्य का पता चल सके और समय रहते वह भी छल से बच सकें।
भ्रमित करने में माहिर हैं आसाराम
छात्रा के पिता ने आरोप लगाया कि आसाराम बापू और उनके दत्तक पुत्र सुरेशानंद लोगों को भ्रमित करने में माहिर हैं। जो कोई भी उनसे एक बार आंखों में आंखों डालकर बात कर लेता है, वह फिर उन्हें छोड़ नहीं पाता। ऋषि प्रसाद समेत कुछ खास साहित्य के जरिये साधकों को घर बैठे सम्मोहित करने की कोशिश की जाती है। दीक्षा के दौरान आसाराम साधकों को मीडिया के खिलाफ भड़काकर उन्हें न्यूज चैनल के बजाय आश्रम से जुड़े तीन चैनल देखने की सलाह देते हैं। जबकि सुरेशानंद गुरु के प्रति निष्ठा व उन्हें भगवान मान पूजने को प्रेरित करते हैं।
छात्रा के पिता ने बताया कि ऋषि प्रसाद पत्रिका पढ़ने के बाद वह 2001 में बरेली सत्संग को गए। वहां की व्यवस्था देख इस कदर प्रभावित हुए कि अप्रैल 2001 में ही अहमदाबाद जाकर दीक्षा ले ली। दीक्षा में आसाराम बापू ने मीडिया वालों को धर्म विरोधी, संत विरोधी, संस्कृति विरोधी बताते हुए न्यूज चैनल कदापि न देखने की सलाह दी। दत्तक पुत्र सुरेशानंद ने गुरु को ही भगवान का स्वरूप बताते हुए सच्ची निष्ठा को प्रेरित किया। प्रति माह गुरु के दर्शन (पूनम दर्शन) को मन वांछित फल वाला बताया। तीसरे मंत्र में साधना, सेवा और जप के लिए प्रेरित किया गया लेकिन अब उनकी असलियत का पता चला।
Source : http://www.jagran.com/news/state-aasaram-case-10715714.html
शाहजहांपुर : आसाराम बापू के समर्थन में चल रही लामबंदी से दुष्कर्म पीड़ित छात्रा के पिता खासे आहत हैं। उन्होंने ऐसे अंध भक्तों के लिए चुनौती भी दी है कि अगर घटना झूठी है तो आसाराम 'सच का सामना' करके दिखाएं। मांग उठाई, पुलिस आसाराम का पॉलीग्राफ टेस्ट और ब्रेन मैपिंग कराए। इन मेडिकल टेस्ट से दुनिया खुद ही सच जान जाएगी और झूठ बेनकाब होगा। वह चाहे मैं ही क्यों न हूं।
'जागरण' से बातचीत में पीड़िता के पिता ने कहा कि तमाम वैज्ञानिक विधियां है, जिनके जरिए सच का पता किया जा सकता है। यदि साधक उनकी बेटी को गलत और बापू को सही मानते हैं तो पुलिस यह टेस्ट जरूर कराए। नारको टेस्ट हो। उन्होंने कहा कि उनका परिवार हर तरह की जांच के लिए तैयार है। पीड़िता के पिता ने सीबीआइ जांच पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग आसाराम का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें भी सीबीआइ जांच की मांग करनी चाहिए, ताकि सत्य का पता चल सके और समय रहते वह भी छल से बच सकें।
भ्रमित करने में माहिर हैं आसाराम
छात्रा के पिता ने आरोप लगाया कि आसाराम बापू और उनके दत्तक पुत्र सुरेशानंद लोगों को भ्रमित करने में माहिर हैं। जो कोई भी उनसे एक बार आंखों में आंखों डालकर बात कर लेता है, वह फिर उन्हें छोड़ नहीं पाता। ऋषि प्रसाद समेत कुछ खास साहित्य के जरिये साधकों को घर बैठे सम्मोहित करने की कोशिश की जाती है। दीक्षा के दौरान आसाराम साधकों को मीडिया के खिलाफ भड़काकर उन्हें न्यूज चैनल के बजाय आश्रम से जुड़े तीन चैनल देखने की सलाह देते हैं। जबकि सुरेशानंद गुरु के प्रति निष्ठा व उन्हें भगवान मान पूजने को प्रेरित करते हैं।
छात्रा के पिता ने बताया कि ऋषि प्रसाद पत्रिका पढ़ने के बाद वह 2001 में बरेली सत्संग को गए। वहां की व्यवस्था देख इस कदर प्रभावित हुए कि अप्रैल 2001 में ही अहमदाबाद जाकर दीक्षा ले ली। दीक्षा में आसाराम बापू ने मीडिया वालों को धर्म विरोधी, संत विरोधी, संस्कृति विरोधी बताते हुए न्यूज चैनल कदापि न देखने की सलाह दी। दत्तक पुत्र सुरेशानंद ने गुरु को ही भगवान का स्वरूप बताते हुए सच्ची निष्ठा को प्रेरित किया। प्रति माह गुरु के दर्शन (पूनम दर्शन) को मन वांछित फल वाला बताया। तीसरे मंत्र में साधना, सेवा और जप के लिए प्रेरित किया गया लेकिन अब उनकी असलियत का पता चला।
Source : http://www.jagran.com/news/state-aasaram-case-10715714.html
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